मेरठ में छात्राओं को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति किया जागरूक, संवाद से तनाव दूर करने का दिया संदेश
मेरठ। विद्यार्थियों में बढ़ते मानसिक तनाव, परीक्षा के दबाव, भविष्य की चिंता और भावनात्मक चुनौतियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से भागीरथी आर्य कन्या इंटर कॉलेज, लालकुर्ती में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम बेटियाँ फाउंडेशन और इम्यून संस्था के संयुक्त प्रयास से आयोजित हुआ।
कार्यक्रम के दौरान मनोवैज्ञानिक डॉ. बर्खा शर्मा (Psyheal) ने छात्राओं से संवाद किया। उन्होंने मानसिक तनाव को समझने, भावनाओं को पहचानने, सकारात्मक सोच विकसित करने और तनावपूर्ण परिस्थितियों से संतुलित तरीके से निपटने के व्यावहारिक उपाय बताए।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय महिला आयोग के अभियान ‘तेरे मेरे सपने’ से जुड़े युवाओं की भागीदारी भी रही। वक्ताओं ने छात्राओं को अपनी परेशानियों को मन में दबाने के बजाय परिवार, शिक्षकों या भरोसेमंद लोगों से बातचीत करने के लिए प्रेरित किया।

‘मन को समझें, तनाव को पहचानें और बात करें’
बेटियाँ फाउंडेशन की अध्यक्ष अंजू पाण्डेय ने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य केवल मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को ऐसे सरल जीवन-कौशल से जोड़ना है, जिन्हें वे रोजमर्रा की जिंदगी में अपना सकें।
उन्होंने छात्राओं को संदेश देते हुए कहा, “मन को समझें, तनाव को पहचानें, बात करें और कोशिश कभी न छोड़ें—क्योंकि कुछ भी असंभव नहीं।” उन्होंने कहा कि असफलता जीवन का अंत नहीं, बल्कि सीखने और आगे बढ़ने का अवसर है। हार के बाद प्रयास छोड़ देना भविष्य की राह को रोक सकता है, इसलिए हर परिस्थिति में उम्मीद बनाए रखना जरूरी है।
परीक्षा और भविष्य की चिंता पर हुई चर्चा
कार्यक्रम की कोऑर्डिनेटर कुसुम शर्मा ने छात्राओं से संवाद करते हुए कहा कि पढ़ाई की चिंता, परीक्षा का दबाव, पारिवारिक अपेक्षाएं और रिश्तों से जुड़ी उलझनें विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे समय में घबराने के बजाय अपनी बात साझा करना और समाधान तलाशना जरूरी है।
काउंसलर मीनू बाना ने कहा कि स्वस्थ मन ही स्वस्थ भविष्य की नींव है। बच्चों और किशोरों को अपनी भावनाओं को समझने तथा बिना झिझक अपनी बात रखने के लिए सुरक्षित और सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराना समाज की साझा जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम में छात्राओं को भावनात्मक संतुलन, आत्मविश्वास, सकारात्मक संवाद, डिजिटल संतुलन, परीक्षा तनाव और जरूरत पड़ने पर सहायता लेने के महत्व के बारे में जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय की प्रिंसिपल श्रीमती लता ने बेटियाँ फाउंडेशन, इम्यून संस्था और पूरी टीम का आभार व्यक्त किया। उन्होंने भविष्य में भी विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य और व्यक्तित्व विकास से जुड़े ऐसे जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाने की अपेक्षा जताई।
