October 21, 2026

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मेरठ में जमीन विवाद में रिश्वत मांगने के आरोप में बड़ी कार्रवाई, मवाना खुर्द चौकी इंचार्ज समेत 3 पुलिसकर्मी सस्पेंड

मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में जमीन से जुड़े पारिवारिक विवाद को लेकर पुलिस विभाग में बड़ी कार्रवाई की गई है। मामले में कथित रूप से झूठा मुकदमा दर्ज कराने, जांच के दौरान आरोपियों के नाम हटाने और धाराएं हल्की करने के एवज में रिश्वत मांगने के आरोप सामने आए हैं। डीआईजी मेरठ रेंज के निर्देश पर कराई गई जांच के बाद मवाना खुर्द चौकी इंचार्ज विकास कुमार, जांचकर्ता दरोगा नीरज कुमार और कांस्टेबल सचिन नौटियाल को निलंबित कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।

मामला जमीन के बंटवारे और परिवार के सदस्यों के बीच चल रहे विवाद से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि शामली में तैनात एक पुलिसकर्मी ने मेरठ में अपने ही परिवार के लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। इसके बाद जब मामला पुलिस जांच के दायरे में आया, तो पीड़ित पक्ष ने जांच अधिकारी और संबंधित चौकी इंचार्ज पर रिश्वत मांगने के गंभीर आरोप लगाए। पीड़ित परिवार का दावा है कि उनके पास रिश्वत मांगने से संबंधित ऑडियो रिकॉर्डिंग भी मौजूद है।

जमीन के पारिवारिक विवाद में दर्ज हुआ मुकदमा

जानकारी के अनुसार, मेरठ में एक परिवार के बीच जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। आरोप है कि इसी विवाद को लेकर शामली में तैनात एक सिपाही ने अपने परिवार के सदस्यों के खिलाफ कथित तौर पर झूठा मुकदमा दर्ज करा दिया। मामले में पुलिस की कार्रवाई शुरू होने के बाद परिवार के दूसरे पक्ष को कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

पीड़ित पक्ष का आरोप है कि जमीन से जुड़ा विवाद पारिवारिक था, लेकिन इसे आपराधिक मुकदमे का रूप दे दिया गया। इसके बाद मामले की जांच शुरू हुई और संबंधित लोगों के बयान तथा अन्य तथ्यों के आधार पर पुलिस कार्रवाई आगे बढ़ने लगी।

हालांकि, मुकदमा दर्ज कराने वाले पक्ष के आरोपों और पीड़ित परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों की पूरी सच्चाई जांच के निष्कर्षों तथा संबंधित दस्तावेजों से ही स्पष्ट होगी। फिलहाल, इस मामले में तीन पुलिसकर्मियों के निलंबन की कार्रवाई सामने आई है।

नाम निकालने और धाराएं हल्की करने के बदले रिश्वत मांगने का आरोप

पीड़ित परिवार का आरोप है कि मुकदमे की जांच के दौरान उन्हें राहत देने के नाम पर रिश्वत की मांग की गई। उनका कहना है कि जांचकर्ता दरोगा नीरज कुमार और चौकी इंचार्ज विकास कुमार ने कथित तौर पर केस से नाम हटाने और मुकदमे में लगाई गई धाराओं को हल्का करने के लिए पैसे मांगे।

आरोपों के मुताबिक, परिवार के सदस्यों को मुकदमे से राहत दिलाने के बदले रकम मांगी गई थी। पीड़ितों का दावा है कि रिश्वत मांगने से संबंधित बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग उनके पास मौजूद है। इसी रिकॉर्डिंग को मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य बताते हुए उन्होंने अधिकारियों से कार्रवाई की मांग की।

यदि किसी जांच में पुलिसकर्मियों द्वारा मुकदमे से नाम हटाने या धाराएं कम करने के बदले रिश्वत मांगने की पुष्टि होती है, तो यह पुलिस की कार्यप्रणाली और कानून के निष्पक्ष पालन पर गंभीर सवाल खड़े करता है। हालांकि, किसी भी आरोप को अंतिम रूप से सिद्ध मानने से पहले विभागीय जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्कर्ष निकाला जाना जरूरी है।

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जिला अधिकारियों से शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई का आरोप

पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्होंने मामले को लेकर कई बार जिले के अधिकारियों के सामने अपनी शिकायत रखी थी। परिवार का आरोप है कि रिश्वत मांगने के गंभीर आरोपों और ऑडियो रिकॉर्डिंग का हवाला देने के बावजूद उन्हें लंबे समय तक कार्रवाई का इंतजार करना पड़ा।

पीड़ित पक्ष के मुताबिक, जब स्थानीय स्तर पर उनकी शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई, तो उन्होंने उच्च अधिकारियों का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया। इसके बाद मामला डीआईजी मेरठ रेंज तक पहुंचा।

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इस घटनाक्रम ने पुलिस विभाग में शिकायतों के निस्तारण और भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच को लेकर सवाल खड़े किए हैं। आमतौर पर पुलिस से अपेक्षा की जाती है कि वह पारिवारिक और जमीन संबंधी विवादों में निष्पक्षता से कार्रवाई करे तथा दोनों पक्षों के तथ्यों और साक्ष्यों को ध्यान में रखकर कानून के अनुसार जांच पूरी करे।

पीड़ित परिवार की शिकायत पर उच्च स्तर से जांच कराए जाने के बाद मामले में कार्रवाई हुई। इससे पहले स्थानीय अधिकारियों की ओर से क्या कदम उठाए गए थे और शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई में देरी क्यों हुई, इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आना अभी बाकी है।

डीआईजी के निर्देश पर कराई गई जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए डीआईजी मेरठ रेंज के यहां शिकायत की गई। इसके बाद उनके निर्देश पर पूरे प्रकरण की जांच कराई गई। जांच में लगाए गए आरोपों, संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका और उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल की गई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, जांच रिपोर्ट में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए। इसके बाद विभाग की ओर से कार्रवाई करते हुए चौकी इंचार्ज विकास कुमार, जांचकर्ता दरोगा नीरज कुमार और कांस्टेबल सचिन नौटियाल को निलंबित कर दिया गया।

यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब पुलिस विभाग में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के मामलों में जवाबदेही को लेकर लगातार सवाल उठते रहते हैं। विभागीय जांच में प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए जाने के बाद निलंबन को संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ शुरुआती प्रशासनिक कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है।

हालांकि, निलंबन अपने आप में आरोपों का अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं होता। मामले में आगे की विभागीय जांच और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं के परिणाम महत्वपूर्ण होंगे।

तीन पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई से विभाग में चर्चा

जमीन के पारिवारिक विवाद से शुरू हुआ यह मामला अब पुलिसकर्मियों पर रिश्वत मांगने के आरोप और विभागीय कार्रवाई को लेकर चर्चा में है। एक चौकी इंचार्ज, एक दरोगा और एक कांस्टेबल के निलंबन से यह स्पष्ट है कि शिकायत को उच्च स्तर पर उठाए जाने के बाद विभाग ने कार्रवाई की है।

इस प्रकरण में सबसे अहम सवाल यह है कि क्या मुकदमा दर्ज कराने से लेकर जांच के दौरान कथित रिश्वत मांगने तक की पूरी प्रक्रिया में नियमों का पालन किया गया था। साथ ही, पीड़ित परिवार की ओर से बताई गई ऑडियो रिकॉर्डिंग की प्रमाणिकता और उसमें हुई बातचीत की परिस्थितियों की जांच भी महत्वपूर्ण हो सकती है।

यदि आरोपों की आगे भी पुष्टि होती है, तो संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय नियमों और लागू कानून के तहत अतिरिक्त कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर मामले की आगे की दिशा तय होगी।

निष्पक्ष जांच से सामने आएगा पूरा सच

मेरठ के इस मामले ने एक बार फिर जमीन विवादों में पुलिस की भूमिका और शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई करने की जरूरत को सामने रखा है। जमीन से जुड़े पारिवारिक विवाद कई बार लंबे समय तक चलते हैं। ऐसे मामलों में पुलिस की निष्पक्ष जांच दोनों पक्षों के अधिकारों की रक्षा करने और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी होती है।

फिलहाल, डीआईजी मेरठ रेंज के निर्देश पर हुई जांच के बाद चौकी इंचार्ज विकास कुमार, दरोगा नीरज कुमार और कांस्टेबल सचिन नौटियाल को निलंबित किया गया है। पीड़ित परिवार ने रिश्वत मांगने की ऑडियो रिकॉर्डिंग होने का दावा किया है, जबकि मामले में अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आएगा।

अब निगाहें इस बात पर हैं कि विभागीय जांच में आगे क्या तथ्य सामने आते हैं और क्या इस मामले में निलंबन के बाद कोई अतिरिक्त कार्रवाई की जाती है।

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