October 28, 2026

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मेरठ की सुभारती यूनिवर्सिटी का कार्यक्रम चर्चा में, 21 अक्टूबर को ‘अखंड भारत स्वतंत्रता दिवस’ घोषित करने की मांग

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मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ स्थित सुभारती विश्वविद्यालय का एक कार्यक्रम चर्चा में है। 21 अक्टूबर को ‘अखंड भारत का स्वतंत्रता दिवस’ घोषित करने की मांग के समर्थन में सुभारती ग्रुप ऑफ स्कूल्स के 10 हजार से अधिक विद्यार्थियों के सड़कों पर उतरने का दावा किया गया है। बड़े स्तर पर आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान शहर में यातायात प्रभावित होने की बात भी सामने आई है।

इस कार्यक्रम को लेकर अब इतिहास और स्वतंत्रता दिवस की तारीख को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आखिर 21 अक्टूबर को स्वतंत्रता दिवस घोषित करने की मांग के पीछे क्या ऐतिहासिक आधार है? आइए समझते हैं पूरा मामला।

21 अक्टूबर 1943 का इतिहास क्या है?

दरअसल, 21 अक्टूबर 1943 को नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने सिंगापुर में आजाद हिंद की अस्थायी सरकार की स्थापना की थी। इस सरकार का उद्देश्य भारत को ब्रिटिश शासन से मुक्त कराना था। नेताजी के नेतृत्व में आजाद हिंद फौज ने भी स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इसी ऐतिहासिक घटना के संदर्भ में 21 अक्टूबर को ‘अखंड भारत का स्वतंत्रता दिवस’ घोषित करने की मांग सामने आई है। हालांकि, इस ऐतिहासिक दिन को स्वतंत्रता दिवस के रूप में घोषित करने की मांग और भारत के आधिकारिक स्वतंत्रता दिवस के बीच अंतर समझना जरूरी है।

भारत को 15 अगस्त 1947 को मिली थी आजादी

भारत ने 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता प्राप्त की थी। इसी ऐतिहासिक अवसर की याद में हर साल 15 अगस्त को पूरे देश में स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है। सरकारी समारोहों से लेकर स्कूलों और कॉलेजों तक, इस दिन तिरंगा फहराकर स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को याद किया जाता है।

ऐसे में सुभारती विश्वविद्यालय के कार्यक्रम को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि 21 अक्टूबर को ‘अखंड भारत का स्वतंत्रता दिवस’ घोषित करने की मांग को विद्यार्थियों के सामने किस ऐतिहासिक संदर्भ में प्रस्तुत किया गया।

इतिहास की शिक्षा और विद्यार्थियों की समझ पर बहस

शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी विद्यार्थियों को इतिहास की घटनाओं, उनके महत्व और उनके संदर्भों की सही जानकारी देना है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस और आजाद हिंद सरकार का इतिहास भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का महत्वपूर्ण अध्याय है।

हालांकि, 21 अक्टूबर 1943 को आजाद हिंद की अस्थायी सरकार की स्थापना और 15 अगस्त 1947 को भारत की स्वतंत्रता प्राप्ति दो अलग-अलग ऐतिहासिक घटनाएं हैं। इन दोनों के बीच अंतर स्पष्ट रखना जरूरी है।

अब इस कार्यक्रम को लेकर चर्चा का विषय यह है कि क्या इस मांग के पीछे ऐतिहासिक तथ्यों को पर्याप्त स्पष्टता के साथ रखा गया और विद्यार्थियों को इसकी पूरी जानकारी दी गई।


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