मऊ में किशोर अपहरण मामले में 3 IPS अधिकारियों की होगी जांच, सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद यूपी सरकार का कदम
मऊ में किशोर अपहरण मामले में 3 IPS अधिकारियों की होगी जांच, सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद यूपी सरकार का कदम
मऊ। उत्तर प्रदेश के मऊ में वर्ष 2017 में 14 वर्षीय किशोर के अपहरण के मामले में कथित लापरवाही को लेकर तीन IPS अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। मामले में सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद उत्तर प्रदेश शासन ने तत्कालीन पुलिस अधीक्षकों अविनाश पांडेय, डॉ. इलामारन जी. और कमलेश बहादुर के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं। आरोप है कि किशोर के अपहरण के मामले में पुलिस ने जांच और कानूनी कार्रवाई में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई।
2017 में हुआ था 14 वर्षीय किशोर का अपहरण
मामला मऊ जिले का है, जहां वर्ष 2017 में एक 14 वर्षीय किशोर का अपहरण हुआ था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने इस मामले में छह आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था, लेकिन अभियोजन पक्ष की ओर से केवल दो गवाहों की गवाही कराई गई। किशोर का पता लगाने और मामले की प्रभावी जांच को लेकर पुलिस की भूमिका पर सवाल उठे।
सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई पर जताई नाराजगी
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई और जांच में कथित कमियों पर नाराजगी जताई। अदालत की टिप्पणियों के बाद मामले में तत्कालीन पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने का मुद्दा सामने आया है।
आरोप है कि किशोर के अपहरण जैसे गंभीर मामले में प्रभावी जांच और आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई। इसी संदर्भ में तीन तत्कालीन पुलिस अधीक्षकों की भूमिका की जांच की जाएगी।
अविनाश पांडेय, इलामारन जी. और कमलेश बहादुर के खिलाफ जांच
इस मामले में जिन तीन IPS अधिकारियों के खिलाफ जांच की बात सामने आई है, उनमें अविनाश पांडेय, डॉ. इलामारन जी. और कमलेश बहादुर शामिल हैं। तीनों अधिकारी संबंधित अवधि में मऊ में पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात रहे थे।
जांच का उद्देश्य यह पता लगाना होगा कि मामले की जांच और कार्रवाई में किन स्तरों पर चूक हुई तथा संबंधित अधिकारियों की क्या जिम्मेदारी बनती है। जांच के निष्कर्ष आने से पहले किसी अधिकारी को दोषी मानना उचित नहीं होगा।
16 नवंबर को अगली सुनवाई
दी गई जानकारी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को होनी है। तब तक जांच अधिकारी नियुक्त करने और तीनों अधिकारियों के खिलाफ औपचारिक विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का निर्देश दिया गया है।
इस मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और अदालत के निर्देशों के अनुरूप होगी।
रिपोर्टों के अनुसार, अभियोजन पक्ष के कुल 54 गवाहों में से केवल दो के बयान दर्ज हुए थे। सुप्रीम कोर्ट ने 2023 से मऊ में एसपी के पद पर तैनात रहे अधिकारियों के खिलाफ दो सप्ताह के भीतर विभागीय कार्यवाही शुरू करने और अगली सुनवाई पर कार्रवाई का विवरण देने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई 16 नवंबर 2026 को निर्धारित है।
