मेरठ नीला ड्रम हत्याकांड: मुस्कान-साहिल को फांसी, लेकिन 18 महीने बाद भी ओमपाल का घर सील; बोले- अब तो खोल दो
मेरठ: चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद भी इस घटना से जुड़ा एक परिवार आज तक दर्द झेल रहा है। जिस मकान में सौरभ की हत्या हुई थी, उसके मालिक 70 वर्षीय ओमपाल पिछले 18 महीनों से परेशान हैं। उनके मकान का एक हिस्सा अब भी पुलिस की ओर से सील रखा गया है। ओमपाल का कहना है कि मकान बंद होने के कारण न तो वह उसे किराए पर दे पा रहे हैं और न ही बेच पा रहे हैं।
इस घटना ने जहां पूरे देश को झकझोर दिया था, वहीं मकान मालिक ओमपाल की जिंदगी पर भी इसका गहरा असर पड़ा है। जिस मकान से मिलने वाले किराए के सहारे वह और उनकी पत्नी बुढ़ापे में अपना खर्च चलाते थे, वही मकान अब उनके लिए आर्थिक परेशानी और सामाजिक बदनामी का कारण बन गया है।
‘अब तो हमारा घर खोल दो’, पुलिस से ओमपाल की गुहार
मकान मालिक ओमपाल ने अपना दर्द बयां करते हुए पुलिस से घर खोलने की गुहार लगाई। बातचीत के दौरान वह भावुक हो गए और उनकी आंखें भर आईं। उन्होंने हाथ जोड़कर कहा कि अब तो उनका घर खोल दिया जाए। उनका सवाल है कि जब मामले में आरोपितों को सजा सुनाई जा चुकी है, तो आखिर उनके मकान का हिस्सा अब तक बंद क्यों रखा गया है?
ओमपाल के मुताबिक, मकान का एक हिस्सा लंबे समय से सील होने के कारण वह उसका इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। उनके लिए यह केवल एक बंद कमरा या मकान का हिस्सा नहीं, बल्कि बुढ़ापे में आर्थिक सहारे का साधन भी है।
उन्होंने बताया कि मकान को किराए पर देकर होने वाली आमदनी से उनका और उनकी पत्नी का खर्च चलता था। लेकिन अब स्थिति यह है कि मकान का संबंधित हिस्सा बंद होने के कारण उनकी परेशानी लगातार बढ़ रही है।
न किराए पर दे पा रहे, न बेच पा रहे मकान
ओमपाल का कहना है कि मकान सील रहने के कारण उनकी संपत्ति उनके किसी काम नहीं आ रही। वह न तो इसे किराए पर दे पा रहे हैं और न ही बेच पा रहे हैं। लंबे समय से मकान का इस्तेमाल नहीं कर पाने के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
बुढ़ापे में जब आमदनी के सीमित साधन होते हैं, तब संपत्ति से मिलने वाला किराया परिवार के लिए बड़ी मदद साबित होता है। ओमपाल और उनकी पत्नी के लिए भी यह मकान इसी तरह का सहारा था। लेकिन हत्याकांड के बाद मकान का एक हिस्सा सील होने से उनकी रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हुई है।
ओमपाल की शिकायत है कि जिस अपराध से उनका कोई लेना-देना नहीं था, उसकी वजह से उन्हें लगातार परेशानी झेलनी पड़ रही है। वह चाहते हैं कि संबंधित अधिकारी उनके मामले पर ध्यान दें और मकान को खोलने के संबंध में उचित निर्णय लें।
रिश्तेदारों और पड़ोसियों ने भी बनाई दूरी
ओमपाल का दर्द केवल आर्थिक परेशानी तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि नीला ड्रम हत्याकांड के बाद लोगों का उनके प्रति व्यवहार भी बदल गया। रिश्तेदारों, पड़ोसियों और दोस्तों ने उनसे दूरी बना ली।
ओमपाल के मुताबिक, लोग उन्हें इस तरह देखते हैं, मानो हत्या उन्होंने ही की हो। उनका कहना है कि जिस मकान में यह वारदात हुई, उसका मालिक होने के कारण उन्हें सामाजिक रूप से भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उनकी पीड़ा इस बात से भी जाहिर होती है कि वह बार-बार अपनी बेगुनाही और अपनी स्थिति की ओर ध्यान दिलाना चाहते हैं। उनका कहना है कि किसी अपराध के घटनास्थल पर उनका मकान होना उन्हें उस अपराध का जिम्मेदार नहीं बनाता।
इस घटना ने उनके सामाजिक जीवन पर भी असर डाला है। वह चाहते हैं कि लोग उन्हें हत्याकांड से जोड़कर देखने के बजाय उनकी परिस्थितियों को समझें।
सौरभ राजपूत हत्याकांड ने देशभर में बटोरी थी सुर्खियां
मेरठ का नीला ड्रम हत्याकांड देशभर में चर्चा का विषय बना था। सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में मुस्कान और साहिल का नाम सामने आया था। इस मामले की भयावहता और जांच से जुड़े घटनाक्रमों ने लोगों को झकझोर दिया था।
मामले में मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा सुनाए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, ओमपाल के लिए इस मामले का एक अलग पहलू है। वारदात के बाद उनके मकान का एक हिस्सा सील रहने से उनकी संपत्ति और निजी जीवन पर लगातार असर पड़ रहा है।
जहां हत्याकांड के आरोपितों को सजा सुनाए जाने की खबर चर्चा में रही, वहीं मकान मालिक की परेशानी का समाधान अब भी उनके लिए बड़ा सवाल बना हुआ है।
मकान खोलने के लिए प्रशासन से उम्मीद
ओमपाल की मांग है कि उनके मकान के सील हिस्से को खोलने के संबंध में संबंधित अधिकारी उचित कार्रवाई करें। उनका कहना है कि वह लंबे समय से परेशान हैं और अब उन्हें राहत मिलनी चाहिए।
हालांकि, किसी आपराधिक मामले में घटनास्थल को सील करने और बाद में उसे खोलने का निर्णय जांच, साक्ष्यों, न्यायालय के आदेशों और लागू कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर कर सकता है। इसलिए इस मामले में मकान खोलने की स्थिति और आगे की प्रक्रिया के बारे में संबंधित पुलिस या प्रशासनिक अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने आना जरूरी है।
फिलहाल, ओमपाल की पीड़ा एक ऐसे व्यक्ति की परेशानी को सामने लाती है, जिसकी संपत्ति एक गंभीर आपराधिक मामले से जुड़ गई और जिसका सामान्य जीवन इससे प्रभावित हुआ। उनकी गुहार है कि अब उनकी परेशानी को भी गंभीरता से सुना जाए।
ओमपाल का सवाल आज भी वही है—जब मामले में सजा सुनाई जा चुकी है, तो उनका घर कब खुलेगा?
