October 22, 2026

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मेरठ में कारोबारी से 4.74 लाख रुपये की वसूली का आरोप, दारोगा सस्पेंड; लिसाड़ीगेट थाने की भूमिका पर जांच

मेरठ लिसाड़ीगेट थाने में कारोबारी से कथित वसूली के मामले की जांच

मेरठ लिसाड़ीगेट थाने में कारोबारी से कथित वसूली के मामले की जांच

मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के लिसाड़ीगेट थाने में नोएडा के एक कारोबारी को कथित तौर पर हिरासत में रखकर 4.74 लाख रुपये वसूलने का मामला सामने आया है। आरोप है कि कारोबारी को एक शिकायत के आधार पर उठाकर थाने लाया गया और हवालात में बंद रखा गया। उसकी रिहाई के बदले आठ लाख रुपये की मांग किए जाने का भी आरोप है। मामले में मुजफ्फरनगर में तैनात रहे दारोगा आरिफ अली की भूमिका सामने आने के बाद मुजफ्फरनगर के एसएसपी ने उन्हें निलंबित कर दिया है। वहीं, मेरठ में पुलिसकर्मियों की भूमिका को लेकर जांच की जा रही है।

फर्जी शिकायत के जरिए कारोबारी को फंसाने का आरोप

मिली जानकारी के अनुसार, मामला अगस्त के पहले सप्ताह का बताया जा रहा है। नोएडा के कारोबारी शाहिद चौधरी के खिलाफ कथित तौर पर एक शिकायत दर्ज कराई गई थी। आरोप है कि इस शिकायत को तैयार कराने में मुजफ्फरनगर में तैनात दारोगा आरिफ अली ने भूमिका निभाई। इसमें लिसाड़ीगेट क्षेत्र में कारोबार करने वाले शादाब राव की मदद लिए जाने का भी आरोप है।

बताया जा रहा है कि शिकायत के बाद लिसाड़ीगेट थाने की पुलिस शाहिद चौधरी को पकड़कर मेरठ ले आई। कारोबारी को थाने में हिरासत में रखा गया। आरोप है कि इस दौरान उसकी रिहाई के बदले आठ लाख रुपये की मांग की गई। हालांकि, शिकायत में लगाए गए इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

4.74 लाख रुपये वसूलने का आरोप

शिकायत के मुताबिक, कारोबारी से कथित तौर पर 4.74 लाख रुपये वसूले गए। आरोप है कि यह रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कराई गई। इस पूरे मामले में शादाब राव की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई जा रही है।

आरोप यह भी है कि कारोबारी का आईफोन पैसे मिलने तक दारोगा अंकित सागर के पास गिरवी रखा गया था। अंकित सागर लिसाड़ीगेट थाने की साइबर डेस्क के प्रभारी बताए जा रहे हैं। इस मामले में सिपाही नीरज की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायत में थाने के तत्कालीन प्रभारी के संरक्षण की बात भी कही गई है। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पुलिसकर्मियों का पक्ष सामने आना बाकी है।

दारोगा आरिफ अली पर भी गंभीर आरोप

इस प्रकरण में दारोगा आरिफ अली पर बिचौलिये की भूमिका निभाने का आरोप है। शिकायत के अनुसार, उन्होंने कारोबारी को केस खत्म कराने का भरोसा दिलाया और अपनी पत्नी के बैंक खाते में एक लाख रुपये ट्रांसफर कराए। इस लेनदेन का उद्देश्य और परिस्थितियां क्या थीं, यह जांच का विषय है।

आरिफ अली पहले लिसाड़ीगेट थाने में तैनात रह चुके हैं। आरोप है कि इसी दौरान उनका क्षेत्र के कुछ लोगों से संपर्क बना हुआ था। शिकायत में शादाब राव का नाम भी प्रमुखता से लिया गया है। बताया जाता है कि वह थाने के सामने विदेश में पैसा भेजने का कारोबार करता है। साइबर डेस्क की ईमेल आईडी तक उसकी कथित पहुंच होने के आरोप भी लगाए गए हैं। पुलिस जांच में इन दावों की पड़ताल की जानी बाकी है।

अधिकारियों से शिकायत के बाद शुरू हुई जांच

पीड़ित कारोबारी और उसकी पत्नी ने कथित वसूली के बाद जिले के अधिकारियों से शिकायत की थी। आरोप है कि शुरुआती शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद दो दिन पहले डीआईजी कलानिधि नैथानी से साक्ष्यों के साथ शिकायत किए जाने की बात सामने आई।

शिकायत के बाद मेरठ और मुजफ्फरनगर पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी। फिलहाल, मुजफ्फरनगर के एसएसपी ने दारोगा आरिफ अली को निलंबित कर दिया है। मेरठ में तैनात पुलिसकर्मियों और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।

जांच के बाद सामने आएगी पूरी सच्चाई

मामले ने पुलिस थानों में शिकायतों की जांच, हिरासत में लिए गए लोगों के अधिकारों और पुलिसकर्मियों की जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह पुलिस व्यवस्था के दुरुपयोग का गंभीर मामला होगा।

फिलहाल, उपलब्ध जानकारी शिकायत में लगाए गए आरोपों पर आधारित है। संबंधित पुलिसकर्मियों और अन्य नामजद लोगों का पक्ष तथा जांच के अंतिम निष्कर्ष सामने आने बाकी हैं। ऐसे में पूरे मामले में किसी की भूमिका को दोष सिद्ध होने से पहले अंतिम रूप से तय नहीं माना जा सकता। अब सबकी नजर पुलिस जांच और आगे होने वाली कार्रवाई पर है।

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