अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर कांग्रेस का विरोध, दुष्यंत गौतम को राज्यपाल बनाए जाने पर देहरादून में मौन उपवास
अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर कांग्रेस का विरोध, दुष्यंत गौतम को राज्यपाल बनाए जाने पर देहरादून में मौन उपवास
देहरादून। उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर एक बार फिर सियासत तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के नेता दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के बाद कांग्रेस ने विरोध जताया है। देहरादून में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इस फैसले के खिलाफ मौन उपवास कर अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े सवालों को फिर से उठाया।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं का यह विरोध ऐसे समय में हुआ है, जब अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित VIP की भूमिका को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। मामले में सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक मंचों तक कई तरह के दावे और आरोप सामने आते रहे हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति की संलिप्तता को लेकर लगाए गए आरोपों और अदालत में साबित हुए तथ्यों के बीच अंतर करना जरूरी है।
दुष्यंत गौतम की नियुक्ति के बाद फिर गरमाया मामला
दुष्यंत गौतम का नाम भी इस मामले को लेकर सार्वजनिक बहस और कुछ आरोपों में सामने आया है। अब उन्हें सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के बाद कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सवाल उठाए हैं। देहरादून में आयोजित मौन उपवास के जरिए कार्यकर्ताओं ने अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने और मामले से जुड़े अनुत्तरित सवालों पर ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की।
कांग्रेस का विरोध इस बात को लेकर राजनीतिक बहस को फिर सामने लाता है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित VIP की भूमिका से जुड़े सवालों की स्थिति क्या है। विपक्ष इस मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग करता रहा है। वहीं, किसी भी व्यक्ति के खिलाफ आरोपों पर निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।
क्या था अंकिता भंडारी हत्याकांड?
अंकिता भंडारी उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल क्षेत्र में एक रिसॉर्ट में काम करती थीं। सितंबर 2022 में उनकी हत्या का मामला सामने आने के बाद पूरे उत्तराखंड में आक्रोश फैल गया था। इस मामले ने महिलाओं की सुरक्षा, पर्यटन स्थलों पर काम करने वाली महिलाओं की स्थिति और प्रभावशाली लोगों की कथित भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
मामले में रिसॉर्ट संचालक पुलकित आर्य और उसके दो सहयोगियों के खिलाफ मुकदमा चला। वर्ष 2025 में कोटद्वार की अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बावजूद कथित VIP से जुड़े सवालों को लेकर समय-समय पर राजनीतिक विवाद उठता रहा है।
अब आगे क्या?
दुष्यंत गौतम को राज्यपाल बनाए जाने के बाद कांग्रेस के विरोध ने अंकिता भंडारी हत्याकांड को एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब देखना होगा कि इस मुद्दे पर भाजपा की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है और कथित VIP से जुड़े सवालों पर राजनीतिक दलों के बीच बहस किस दिशा में आगे बढ़ती है।
अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग आज भी उत्तराखंड की राजनीति और जनचर्चा का अहम विषय बनी हुई है।
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