मेरठ के उल्देपुर में अवैध कॉलोनियों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 9 दिसंबर को फिर होगी सुनवाई
मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में अवैध निर्माण और अवैध कॉलोनियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख लगातार सख्त होता जा रहा है। शहर के बाहरी इलाके स्थित उल्देपुर गांव में विकसित की गई अवैध आवासीय कॉलोनियों को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट ने विस्तृत जांच के लिए न्यायिक आयोग गठित करने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 9 दिसंबर 2026 को होगी।
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखी गई रिपोर्ट में बताया गया कि उल्देपुर के आसपास बड़ी संख्या में ऐसी आवासीय कॉलोनियां विकसित हुई हैं, जिनके लिए संबंधित प्राधिकरण से आवश्यक अनुमति या स्वीकृत नक्शे नहीं लिए गए। अदालत ने यह भी जानना चाहा है कि इन कॉलोनियों के लिए इस्तेमाल की गई जमीन सरकारी है या निजी और यदि जमीन निजी है तो जमीन मालिकों तथा खरीदारों के बीच किस तरह के लेन-देन हुए।
उल्देपुर की कॉलोनियों की होगी गहन जांच
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच के लिए पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग गठित किया है। आयोग यह जांच करेगा कि उल्देपुर में अवैध कॉलोनियां कैसे विकसित हुईं, जमीन का स्वामित्व किसके पास है और संबंधित विभागों की भूमिका क्या रही। रिपोर्टों के मुताबिक अदालत ने यह सवाल भी उठाया है कि मेरठ विकास प्राधिकरण कई वर्षों तक इन कॉलोनियों के विकास को रोकने में क्यों प्रभावी कार्रवाई नहीं कर सका।
ध्वस्तीकरण को लेकर बढ़ा विवाद
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद उल्देपुर क्षेत्र में अवैध निर्माणों और कॉलोनियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई है। अगस्त में मेरठ के बाहरी क्षेत्र में कई अवैध कॉलोनियों की सड़क और अन्य निर्माणों पर मेडा की कार्रवाई की रिपोर्ट सामने आई थी।
25 सितंबर को उल्देपुर में ध्वस्तीकरण के विरोध में धरना भी शुरू हुआ। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार संयुक्त मेरठ बचाओ आंदोलन समिति के अध्यक्ष रविंद्र गुर्जर के नेतृत्व में किसान, व्यापारी, मकान मालिक और भूखंड खरीदार धरने में शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने कार्रवाई रोकने तथा प्रभावित लोगों को राहत देने की मांग की।
रिपोर्टों में रविंद्र गुर्जर और अन्य वक्ताओं के हवाले से कहा गया कि प्रभावित लोगों को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग भी की है। हालांकि, उनके द्वारा किए गए विभिन्न व्यक्तिगत दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध स्रोतों से नहीं होती, इसलिए उन्हें तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा रहा है।
सेंट्रल मार्केट के बाद उल्देपुर पर भी नजर
मेरठ में अवैध निर्माण का मामला केवल उल्देपुर तक सीमित नहीं है। शास्त्रीनगर के सेंट्रल मार्केट में भी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद अवैध निर्माण और अनधिकृत व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई हुई है। सितंबर में वहां ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू होने की रिपोर्ट सामने आई थी।
21 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखी गई रिपोर्ट में मेरठ के जोन-ए में 16,726 अवैध निर्माण चिन्हित किए जाने की जानकारी दी गई। इनमें 12,907 आवासीय, 874 आवासीय-सह-वाणिज्यिक और 2,945 गैर-आवासीय निर्माण बताए गए। अदालत ने संबंधित परिसरों को सील करने और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
9 दिसंबर को होगी अगली सुनवाई
उल्देपुर मामले में अब न्यायिक आयोग की जांच महत्वपूर्ण होगी। सुप्रीम कोर्ट यह भी देख रहा है कि अवैध कॉलोनियां किन परिस्थितियों में विकसित हुईं और इसके लिए संबंधित विभागों की क्या जिम्मेदारी बनती है। अगली सुनवाई 9 दिसंबर 2026 को निर्धारित है, जिसमें मेरठ के अन्य जोन से संबंधित रिपोर्ट भी अदालत के समक्ष रखी जानी है।
अब आगे क्या?
उल्देपुर के लोगों और जमीन खरीदारों की नजर अब न्यायिक आयोग की जांच तथा सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर है। एक तरफ अदालत के निर्देशों के तहत अवैध निर्माणों पर कार्रवाई का दबाव है, वहीं दूसरी ओर प्रभावित लोगों और स्थानीय संगठनों की ओर से राहत की मांग उठ रही है। आने वाले समय में आयोग की रिपोर्ट और 9 दिसंबर की सुनवाई से इस मामले की अगली दिशा स्पष्ट हो सकती है।
नोट: “सुप्रीम कोर्ट ने 9 दिसंबर तक सभी कॉलोनियां ध्वस्त करने का आदेश दिया” लिखने के बजाय ऊपर “9 दिसंबर को अगली सुनवाई” लिखा गया है, क्योंकि उपलब्ध ताजा अदालती रिपोर्ट में यही अधिक स्पष्ट रूप से पुष्ट है। वहीं उल्देपुर में अवैध निर्माणों को जल्द ध्वस्त करने के निर्देश की रिपोर्ट भी मौजूद है।
