यूपी में ओवैसी की रैलियों से तेज होगी सियासी हलचल, गठबंधन को लेकर बढ़ेगी चर्चा
यूपी में ओवैसी की रैलियों से तेज होगी सियासी हलचल
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक दलों की तैयारियां तेज होती जा रही हैं। इसी क्रम में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी भी उत्तर प्रदेश में लगातार जनसभाएं करने की तैयारी में हैं। पार्टी की ओर से सितंबर और अक्टूबर में कई कार्यक्रमों की जानकारी सामने आई है।
AIMIM की ओर से जारी कार्यक्रमों के मुताबिक, ओवैसी ने 20 सितंबर को कानपुर और 27 सितंबर को श्रावस्ती में जनसभा की, जबकि 11 अक्टूबर को आजमगढ़ में कार्यक्रम प्रस्तावित है। इसके बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भी उनके दौरे प्रस्तावित बताए गए हैं।
ओवैसी लगातार उत्तर प्रदेश में पार्टी के संगठन को मजबूत करने और चुनावी आधार बढ़ाने की बात कर रहे हैं। उन्होंने विपक्षी दलों के साथ गठबंधन की संभावना को भी खुला रखा है। सितंबर में दिए एक बयान में ओवैसी ने कहा था कि AIMIM उत्तर प्रदेश में गठबंधन चाहती है, हालांकि उस समय उन्होंने यह भी कहा था कि कितनी सीटों पर चुनाव लड़ा जाएगा, यह कहना जल्दबाजी होगी।
छोटे दलों की गठबंधन पर नजर
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में छोटे और क्षेत्रीय दलों की भूमिका को लेकर भी चर्चा तेज है। AIMIM के अलावा आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर भी प्रदेश की राजनीति में सक्रिय हैं। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने छोटे दलों के साथ संभावित गठबंधन को लेकर अभी कोई स्पष्ट तस्वीर पेश नहीं की है।
AIMIM की ओर से समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन की इच्छा सार्वजनिक रूप से जाहिर की जा चुकी है। पार्टी के नेताओं का कहना है कि वे विपक्षी दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की संभावना पर विचार कर रहे हैं।
वहीं, उत्तर प्रदेश की राजनीति में राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के भाजपा के साथ जाने के बाद सपा के संभावित गठबंधन समीकरण भी चर्चा में हैं। ऐसे में आने वाले महीनों में छोटे दलों की गतिविधियां और उनके गठबंधन को लेकर रुख चुनावी राजनीति का अहम हिस्सा रहेंगे।
ओवैसी की लगातार जनसभाओं और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित कार्यक्रमों के बीच यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि AIMIM अपने संगठन का विस्तार किस तरह करती है और चुनाव से पहले गठबंधन को लेकर क्या फैसला लेती है।
फिलहाल उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अलग-अलग दलों के बीच संपर्क, जनसभाओं और संगठन विस्तार का दौर जारी है।

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