केसरगंज मस्जिद विवाद: सचिन सिरोही पर केस के बाद बयानबाजी तेज, राशिद अखलाक बोले- कप्तान साहब को सैल्यूट
केसरगंज मस्जिद विवाद: सचिन सिरोही पर केस के बाद बयानबाजी तेज, राशिद अखलाक बोले- कप्तान साहब को सैल्यूट
मेरठ : मेरठ का केसरगंज मस्जिद विवाद अब सिर्फ मस्जिद के निर्माण और धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रह गया है। मामला पुलिस कार्रवाई, नेताओं के बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट तक पहुंच गया है। इसी बीच हिंदूवादी नेता सचिन सिरोही के खिलाफ कथित तौर पर भड़काऊ वीडियो वायरल करने के मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद दोनों पक्षों की ओर से बयान सामने आए हैं।
सचिन सिरोही पर आरोप है कि उन्होंने केसरगंज मस्जिद विवाद को लेकर ऐसा वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित किया, जिसे पुलिस ने समुदायों के बीच तनाव बढ़ाने वाला माना। इससे पहले केसरगंज मस्जिद के बाहर हनुमान चालीसा पाठ के ऐलान के बाद पुलिस-प्रशासन ने इलाके में सुरक्षा बढ़ाई थी और सचिन सिरोही को नजरबंद किए जाने की भी रिपोर्ट सामने आई थी।
मामले में सचिन सिरोही ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि वह अपने घर में नजरबंद थे और उन्होंने हनुमान चालीसा पाठ के कार्यक्रम का आह्वान नहीं किया था। उन्होंने दावा किया कि इसके बावजूद उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया, जबकि उनके अनुसार बड़ी संख्या में लोगों के साथ निकाले गए जुलूस पर कार्रवाई नहीं हुई।
सिरोही ने पुलिस-प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह अपने रुख से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने अपने बयान में कहा, “सचिन सिरोही ना झुका है, ना झुकेगा।” उनके अन्य आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है।
राशिद अखलाक ने पुलिस कार्रवाई पर क्या कहा?
दूसरी ओर, मेरठ के मीट कारोबारी और बसपा नेता हाजी राशिद अखलाक ने सचिन सिरोही के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस अधिकारियों की कार्रवाई की सराहना की। उन्होंने कहा, “सचिन सिरोही के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के बाद मैं अपने कप्तान साहब और मिनी कप्तान को मेरठ की जनता की ओर से सैल्यूट करता हूं।”
केसरगंज मामले में राशिद अखलाक पहले भी पुलिस-प्रशासन के सामने अपना पक्ष रख चुके हैं। 29 सितंबर को उनके नेतृत्व में लोगों के विरोध और पुलिस कार्रवाई की खबरें भी सामने आई थीं।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
केसरगंज मंडी की मस्जिद को लेकर विवाद की शुरुआत निर्माण को लेकर हुई थी। सितंबर में मस्जिद के मौलवी और उनके बेटे पर व्यापारियों की ओर से बदसलूकी और धमकी के आरोप लगाए गए थे। दूसरी तरफ मुस्लिम पक्ष ने सचिन सिरोही और अन्य लोगों पर मस्जिद में जूते पहनकर प्रवेश करने का आरोप लगाया था। पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर कार्रवाई की थी।
इसके बाद विवाद और बढ़ा। हिंदू रक्षा दल की ओर से मस्जिद के बाहर हनुमान चालीसा पाठ का ऐलान किया गया। पुलिस ने इलाके में बैरिकेडिंग की और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया। स्थिति को देखते हुए बाहर से आने वाले लोगों के मस्जिद पहुंचने पर भी रोक लगाई गई थी।
अब सचिन सिरोही पर मुकदमा दर्ज होने के बाद विवाद ने एक नया मोड़ ले लिया है। पुलिस-प्रशासन जहां कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दे रहा है, वहीं दोनों पक्षों के नेता अपने-अपने आरोप और दावे सामने रख रहे हैं। मामले में दर्ज मुकदमे और पुलिस जांच के आगे बढ़ने के साथ ही तस्वीर और साफ होगी।
