मोड़ खुर्द में जलभराव से किसान की फसल बर्बाद, मनरेगा के 22.77 लाख रुपये के खर्च पर उठे सवाल
मोड़ खुर्द गांव में जलभराव से प्रभावित किसान का खेत
बहसूमा। मेरठ के बहसूमा क्षेत्र के गांव मोड़ खुर्द में जलभराव की समस्या को लेकर ग्रामीणों ने पंचायत व्यवस्था और मनरेगा के कार्यों पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव का पानी खेतों की ओर पहुंचने से किसानों की फसलें प्रभावित हो रही हैं, लेकिन जल निकासी की समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।
ग्रामीण गौरव चौधरी का कहना है कि गांव में जलभराव की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। पानी खेतों में पहुंचने के कारण किसानों को फसल के नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि समस्या की जानकारी होने के बावजूद जल निकासी के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं।
22.77 लाख रुपये खर्च होने के दावे पर सवाल
ग्रामीणों के अनुसार, गांव में मनरेगा के तहत 22 लाख 77 हजार 386 रुपये खर्च होने की जानकारी सामने आई है। ग्रामीणों का सवाल है कि यदि इतनी बड़ी धनराशि मनरेगा के कार्यों पर खर्च हुई है तो मौके पर जल निकासी समेत अपेक्षित काम क्यों नजर नहीं आ रहे हैं।
ग्रामीणों ने मनरेगा के तहत खर्च की गई धनराशि का रिकॉर्ड सार्वजनिक करने और अभिलेखों में दर्ज कार्यों का मौके पर सत्यापन कराने की मांग की है। उनका कहना है कि कागजों में दर्ज कार्य और जमीन पर हुए कार्यों का मिलान किया जाना चाहिए।
जलभराव में डूबी किसान की फसल
ग्रामीणों के मुताबिक फेरू पुत्र जयवीर सिंह का खेत भी जलभराव से प्रभावित हुआ है। खेत में पानी भरने से फसल को नुकसान पहुंचने का दावा किया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि किसान को अभी तक फसल नुकसान का कोई मुआवजा नहीं मिला है।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि पानी की निकासी अथवा खेतों में पानी पहुंचने से रोकने के लिए बांध या बंद बनाने जैसे स्थायी उपाय नहीं किए गए हैं।
पंचायत सहायक की भूमिका पर भी सवाल
मामले में ग्रामीणों ने पंचायत सहायक की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए हैं। आरोप लगाया गया है कि मनरेगा के कार्यों में पंचायत सहायक ठेकेदारी जैसी भूमिका निभा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इनकी वास्तविकता संबंधित विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
सौर ऊर्जा की बैटरियां हटने के बाद नहीं लगीं
ग्रामीणों ने गांव में लगी सौर ऊर्जा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सौर ऊर्जा प्लेट की बैटरियां करीब तीन साल पहले उतार ली गई थीं, लेकिन अभी तक नई बैटरियां नहीं लगाई गईं। इसके चलते ग्रामीणों को सौर ऊर्जा व्यवस्था का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।
इसके अलावा पंचायत घर की व्यवस्थाओं और वहां कार्यरत कर्मचारियों को लेकर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों के मुताबिक उन्होंने पंचायत सहायक और पंचायत सचिव से इस संबंध में जानकारी मांगी, लेकिन उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं मिल सका।
ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही मनरेगा में खर्च हुई 22.77 लाख रुपये से अधिक की धनराशि के रिकॉर्ड और मौके पर कराए गए कार्यों का मिलान, जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान और प्रभावित किसान की फसल के नुकसान का आकलन कर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।
